जानिये कंप्यूटर का इतिहास

history of computer

कम्प्युटर को हिन्दी भाषा मे संगणक कहते है क्योकि इसमे बड़ी बड़ी गणना करने की क्षमता होती है। कम्प्युटर शब्द को अंगेजी भाषा के कम्प्यूट शब्द से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है गणना करना। जिसको सीधा सा मतलब है कि कम्प्युटर का विकास गणित की गणना करने के लिए किया गया है। कम्प्युटर का सही तरीके से परिचय 19वीं सदी में चार्ल्स बेबेज ने कराया था जिससे उनको कंप्यूटर का जनक या पिता कहकर पुकारा जाता है।

शुरूआती दौर मे कम्प्युटर इस प्रकार से नही था बल्कि इसका आकार बहुत बड़ा और बहुत ही महगे मिलते थे।पीढ़ी दर पीढ़ी इसमे तकनीकी सुधार किये गये है।

कम्प्युटर की पहली पीढ़ी (समय सीमा 1940 से 1955)

इस पीढ़ी मे कम्प्युटर को कन्टोल और प्रसारण के लिए वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था। कम्प्युटर मे वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग करने से इसका आकार काफी बड़ा था और बिजली भी अधिक मात्रा में खपत करता था।वैक्यूम ट्यूब अत्यधिक गर्मी भी पैदा करता था। इसमे डाटा की गणना करने की क्षमता भी बहुत कम थी और इसके आलावा यह खराब भी बहुत जल्दी हो जाते थे।

कम्प्युटर की दूसरी पीढ़ी समय सीमा (1956 से 1963)

इस पीढ़ी मे ट्रांजिस्टर का अविष्कार किया गया था। जिसके कम्प्युटर मे वैक्यूम ट्यूब को हटाकर ट्रांजिस्टर को लगा दिया गया था। ट्रांजिस्टर, वैक्यूम ट्यूब के मुकाबल छोटे होते थे और इसकी कार्य करने की क्षमता भी अधिक थी। अब कम्प्युटर पहले से थोड़ा तेज काम करने लगा था। ट्रांजिस्टर के प्रयोग से कम्प्युटर का आकार छोटा हो गया और कम गर्मी भी उत्पन्न करता था।

कम्प्युटर की तीसरी पीढ़ी (समय सीमा 1963 से 1971)

इस पीढ़ी मे कम्प्युटर को और भी बेहतर बना दिया गया जिसमे ट्रांजिस्टर को हटाकर इंटीग्रेटेड सर्किट लगा दिया गया।

इंटीग्रेटेड सर्किट के प्रयोग से कम्प्युटर की गति माइक्रो सेकंड से नैनो सेकंड हो गयी थी और इसकी काम करने की क्षमता बढ़ गयी थी। अब कम्प्युटर छोट आकार मे, सस्ते और इनका इस्तेमाल करना काफी आसान हो गया था।

कम्प्युटर की चौथी पीढ़ी समय सीमा (1971 से 1985)

इस पीढ़ी में चिप तथा माइक्रोप्रोसेसर के साथ कम्प्युटर बनने लगे थे। इससे कम्प्युटरो को आकार बहुत ही कम हो गया और इनका कार्य करने की क्षमता अच्छी हो गयी। इसमे चुम्बकीय डिस्क के स्थान पर र्धचालक मैमोरी का प्रयोग होने लगा इसके साथ ही तीव्र गतिमान वाले नेटवर्क का भी अविष्कार हुआ जिन्हे लैन, मैन और वैन के नाम से पहचान मिली। डै MS DOS ऑपरेटिंग सिस्टम और माइक्रोसॉफ्ट विंडोज के साथ कम्प्युटर चलने लगे जिससे मल्टीमीडिया का युग चलने लगा और इसी पीढ़ी मे C भाषा का अविष्कार हुआ जिसके चलते प्रोग्रामिंग करना काफी आसान हो गया था।

कम्प्युटर की पाचवी पीढ़ी (समय सीमा 1971 से अबतक)

(ULSI) यूएलएसआई, ऑप्टीकल डिस्क जैसी चीजों का इस्तेमाल इसी नयी पीढ़ी मे होने लगा था। एक छोटी सी जगह मे आधिक डाटा स्टोर होने लगा। जिससे लैपटाप, डेस्कटॉप पीसी, टेबलेट इत्यादि जैसे यंत्र ने टेक्निकल क्षेत्र मे एक नयी क्रांति ला दी। फिर इन्टरनेट, इमेल और सर्च इंजन का अविष्कार हुआ। और माइक्रोसॉफ्ट विंडोज के नये नये वर्जन आ गये विडोंज XP, विडोंज 7, विडोंज 8 आदि।

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